11 December 2005

लोकार्पण समारोह

महाकवि श्रीकृष्ण सरल द्वारा रचित महाकाव्य अजेय सेनानी "चन्द्रशेखर आज़ाद" 26 भागों में इण्टरनेट पर यूनिकोड फोण्ट में तैयार है। लोकार्पण माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमन्त्री, मध्य प्रदेश शासन, द्वारा - दिनाँक- 14 दिसम्बर 2005 को मुख्यमन्त्री कार्यालय, बल्लभ भवन भोपाल में किया गया (लोकार्पण के क्षण)। अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद का शताब्दी वर्ष पूरे देश में मनाया जा रहा है। ऍसे पावन अवसर पर हिन्दी भाषा में इस महाकाव्य के इण्टरनेट पर प्रकाशित होना बहुत महत्वपूर्ण और सामयिक है। भारतवर्ष तथा विश्व के अन्य देशों में रहने वाले हिन्दी प्रेमी भारतीयों के लिए यह एक अनुपम भेंट है। हमारा अगला प्रयास रहेगा कि सरल जी द्वारा रचित "शहीदे आज़म भगतसिंह" महाकाव्य को भी इण्टरनेट पर पाठकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके।
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लोकार्पण-
अजेय सेनानी
चन्द्रशेखर आज़ाद महाकाव्य
द्वारा-
माननीय
श्री शिवराज सिंह चौहान
मुख्यमन्त्री
मध्य प्रदेश शासन
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विशेष सहयोग
पं० शिव चौबे
सदस्य पंच - ज ( मध्य प्रदेश )
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परिकल्पना एवं निर्माण- डॉ॰ जगदीश व्योम

तकनीकी सहयोग- डॉ॰ पूर्णिमा वर्मन
(संपादक अनुभूति/अभिव्यक्ति जालघर)
* प्रत्यूष

9 Comments:

At 10:18 PM, Blogger King Of Hearts said...

aachi hai
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At 8:50 PM, Anonymous Anonymous said...

श्रीकृष्ण सरल जी के महाकाव्य चन्द्रशेखर आजाद को इंटरनेट पर देकर आपने कितना महान कार्य किया है इसका आकलन तो वक्त ही करेगा। और इससे भी खास बात यह है कि मुख्यमंत्री जी ने अपने व्यस्त समय में से इस महान कार्य के लिए समय देकर और रुचि लेकर यह सिद्ध कर दिया है कि उनका दृष्टिकोण राष्ट्र के अमर शहीदों और उन पर लिखे गए ग्रंथों को लेकर कितना साफ सुथरा और गंभीर है। शहीदों के लिए मेरी निगाह में तो असली कार्य यही है। भगत सिहं महाकाव्य को भी इंटरनेट पर जरूर दिया जाना चाहिए यह कार्य आप ही कर सकते हैं। इस महान कार्य के लिए यदि कुछ मैं सहयोग कर सकूँ तो मुझे अपने जीवन में सबसे बड़ी खुशी का अहसास होगा।
-सुखदेव राना, रंगून

 
At 10:10 AM, Anonymous Anonymous said...

I see the great writen work of maha kavi saral. realy kavi saral was the great poet of India.
A.K. Filauriya, Guahati

 
At 4:39 AM, Anonymous Anonymous said...

ja,yavas ji, apne jo kardikh hai. aachi hai mani net per pali bar UJJAIN KA Kavi saral ka kava dhakha hai.shree saralji ko main dhakha hai. jasha nama vasy hee thai vo.onki yadai raha gai hai. mandakini chourey ujjain india.

 
At 9:25 PM, Blogger प्रदीप मानोरिया said...

वाह श्री मन दा. व्योम जी बहुत बहुत धन्यबाद सरल जी के इस कार्य को एलेक्तोर्निक स्वरुप देने के लिए मुझे यह बताते हुए गर्व है की मैं सरल जी की जन्मभूमि अशोकनगर का ही एक वाशिंदा हूँ
नैनो की विदाई नामक मेरी नई रचना पढने हेतु आपको सादर आमंत्रण है .आपके आगमन हेतु धन्यबाद नियमित आगमन बनाए रखें

 
At 11:18 AM, Anonymous Anonymous said...

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At 9:30 AM, Anonymous Anonymous said...

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At 1:00 AM, Anonymous Anonymous said...

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